चंद्रशेखर
Chandrashekhar (Chandra hai Shikhar par jiske arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चंद्र" और उत्तर पद "शेखर" मिलकर तीसरे विशेष देवता देवाधिदेव महादेव शिव का बोध कराते हैं।
Bahuvrihi Samas (Exocentric / Attributive Compound)
Neither element dominant; refers to an external third referent
जिस समास में पूर्व पद और उत्तर पद में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता, अपितु दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अन्य संज्ञा पद (व्यक्ति, देवता या विशेष वस्तु) की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
An exocentric compound in which neither constituent element is head; instead, the entire compound functions as an attributive epithet denoting a third external entity.
Samanadhikarana Bahuvrihi
जिसमें दोनों पद प्रथमा विभक्ति के होते हैं और मिलकर किसी अन्य व्यक्ति का विशेषण बनते हैं।
Vyadhikarana Bahuvrihi
जिसमें पूर्व पद और उत्तर पद भिन्न-भिन्न कारक विभक्तियों में होते हैं।
समस्त पद किसी पौराणिक देवता, ऐतिहासिक पात्र या विशेष उपाधि का पर्यायवाची/रूढ़ शब्द होता है। विग्रह करने पर अंत में अनिवार्य रूप से "अर्थात्..." लिखकर तीसरे व्यक्ति का नाम स्पष्ट होता है।
The word is almost invariably an epithet or conventional title for a deity, mythological figure, or unique entity. Vigrah always specifies "arthaat..." (meaning/referring to [third person]).
हिंदी व्याकरण की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं (CTET, REET, UP-TET, TGT/PGT, State PSC) में बहुव्रीहि समास का कर्मधारय और द्विगु के साथ तुलनात्मक प्रश्न सबसे अधिक बार पूछा जाता है।
Chandrashekhar (Chandra hai Shikhar par jiske arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चंद्र" और उत्तर पद "शेखर" मिलकर तीसरे विशेष देवता देवाधिदेव महादेव शिव का बोध कराते हैं।
Neelkanth (Neela hai Kanth jiska arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष को कंठ में धारण करने के कारण भगवान शिव को नीलकंठ कहा जाता है।
Trilochan (Teen hain Lochan jiske arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: यद्यपि पहला पद "त्रि" संख्या है, किंतु समस्त पद किसी समूह का नहीं, बल्कि तीसरे विशेष देवता शिव का रूढ़ बोध कराता है।
Trinetra (Teen hain Netra jiske arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर तीसरे विशेष अर्थ भगवान शंकर की ओर संकेत करते हैं; रूढ़ अर्थ में बहुव्रीहि समास है।
Gangadhar (Ganga ko dharan karne wale arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: स्वर्ग से उतरती गंगा के वेग को अपनी जटाओं में धारण करने के कारण शिव जी को गंगाधर कहा जाता है।
Shoolpani (Shool hai Paani mein jiske arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "शूल" और उत्तर पद "पाणि" दोनों मिलकर त्रिशूलधारी महादेव का बोध कराते हैं।
Aashutosh (Aashu tusht hone wale arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: जो अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति और जल मात्र से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, वे भगवान शिव आशुतोष कहलाते हैं।
Pashupati (Pashuon ke pati arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: समस्त चराचर जीवों और प्राणियों के परम स्वामी होने के कारण शिव जी का नाम पशुपति है।
Digambar (Dishaayein hain ambar jinke arthat Shiva / Jain Muni)
व्याकरण तर्क: समस्त पद तीसरे अर्थ (दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले विरक्त संन्यासी/शिव) की ओर संकेत करता है।
Mrityunjay (Mrityu ko jeetne wale arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: जिन्होंने काल और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली है, वे देवाधिदेव शिव मृत्युंजय कहलाते हैं।
Bhootnath (Bhooton ke nath arthat Shiva)
व्याकरण तर्क: समस्त भूतों, पंचमहाभूतों तथा शिवगणों के स्वामी होने के कारण शिव जी को भूतनाथ कहा जाता है।
Chakrapani (Chakra hai Paani mein jiske arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चक्र" और उत्तर पद "पाणि" मिलकर तीसरे विशेष देवता भगवान विष्णु की ओर संकेत करते हैं।
Kamalapati (Kamala ke pati arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद और उत्तर पद दोनों मिलकर तीसरे विशेष देवता भगवान विष्णु की ओर संकेत करते हैं, अतः यह बहुव्रीहि समास है।
Chaturbhuj (Chaar hain Bhujaayein jiski arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: संख्यावाची पद होने पर भी यह चार भुजाओं वाले देवता विष्णु का रूढ़ विशेषण है, अतः बहुव्रीहि समास है।
Murlidhar (Murli ko dharan karne wale arthat Krishna)
व्याकरण तर्क: मुरली बजाने की अद्वितीय कला के कारण श्रीकृष्ण को जनमानस में मुरलीधर कहा जाता है।
Giridhar (Giri ko dharan karne wale arthat Krishna)
व्याकरण तर्क: इंद्र के कोप से गोकुलवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाने वाले श्रीकृष्ण गिरिधर कहलाए।
Damodar (Daam se bandha tha udar jiska arthat Krishna)
व्याकरण तर्क: यशोदा माता द्वारा नटखट बालकृष्ण को ओखल से रस्सी द्वारा बांधे जाने की लीला के कारण उनका नाम दामोदर पड़ा।
Chakradhar (Chakra ko dharan karne wale arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: सुदर्शन चक्र को अपनी उंगली पर धारण करने वाले श्रीहरि विष्णु को चक्रधर कहा जाता है।
Padmanabh (Padma hai naabhi mein jiske arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: जिनकी नाभि से सृष्टि-सर्जक ब्रह्मा का कमल प्रस्फुटित होता है, वे भगवान विष्णु पद्मनाभ कहलाते हैं।
Garuddhwaj (Garud hai dhwaj par jiske arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: जिनके रथ की ध्वजा पर पक्षीराज गरुड़ का चिह्न अंकित है, वे भगवान श्रीहरि गरुड़ध्वज कहलाते हैं।
Janardan (Jan dwara yaachna par kripa karne wale arthat Vishnu)
व्याकरण तर्क: समस्त प्रजा की रक्षा करने और भक्तों के कष्ट हरने वाले भगवान विष्णु को जनार्दन कहा जाता है।
Pankaj (Pank mein janm leta hai jo arthat Kamal)
व्याकरण तर्क: कीचड़ में जन्म लेने वाला कोई भी कीट नहीं, बल्कि यह केवल पवित्र कमल के फूल का रूढ़ वाचक है।
Jalaj (Jal mein janm leta hai jo arthat Kamal)
व्याकरण तर्क: जल में पैदा होने वाले सभी जीवों का नहीं, बल्कि केवल कमल के लिए रूढ़ अर्थ प्रकट करने से बहुव्रीहि समास है।
Lambodar (Lamba hai Udar jiska arthat Ganesh)
व्याकरण तर्क: न "लंबा" पद प्रधान है और न "उदर" पद; दोनों मिलकर तीसरे विशेष व्यक्ति भगवान गणेश की ओर संकेत करते हैं।
Gajanan (Gaj ke saman aanan hai jiska arthat Ganesh)
व्याकरण तर्क: गजमुख धारण करने के कारण भगवान गणेश को गजानन कहा जाता है; यह तीसरे व्यक्ति का रूढ़ नाम है।
Ekdant (Ek hai dant jiska arthat Ganesh)
व्याकरण तर्क: परशुराम जी के साथ युद्ध में एक दांत टूटने के बाद से भगवान गणेश को एकदंत के नाम से जाना जाता है।
Vakratunda (Vakra hai tund jiski arthat Ganesh)
व्याकरण तर्क: वक्र सूंड से सुशोभित भगवान गणेश का यह प्रसिद्ध पौराणिक ध्यान-मंत्र का रूढ़ वाचक है।
Shadanana (Shat hain aanan jiske arthat Kartikeya)
व्याकरण तर्क: छह मुख होने के कारण देव-सेनापति कार्तिकेय को षडानन अथवा षन्मुख कहा जाता है।
Veenapani (Veena hai Paani mein jiske arthat Saraswati)
व्याकरण तर्क: हाथ में वीणा धारण करने वाली विद्या एवं संगीत की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का रूढ़ नाम है।
Veenavadini (Veena ka vaadan karne wali arthat Saraswati)
व्याकरण तर्क: सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की प्रसिद्ध कविता "वर दे वीणावादिनी वर दे" माँ सरस्वती को समर्पित है।
Padmasana (Padma hai aasan jiska arthat Lakshmi)
व्याकरण तर्क: कमल के पुष्प पर विराजमान होने के कारण देवी लक्ष्मी को पद्मासना कहा जाता है।
Ashtabhuja (Aath hain bhujaayein jiski arthat Durga)
व्याकरण तर्क: आठ भुजाओं में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण कर दुष्टों का संहार करने वाली माँ दुर्गा का रूढ़ नाम है।
Simhavahini (Simha hai vaahan jiska arthat Durga)
व्याकरण तर्क: सिंह पर सवारी करने वाली आदिशक्ति माँ दुर्गा को सिंहवाहिनी कहा जाता है।
Hansavahini (Hansa hai vaahan jiska arthat Saraswati)
व्याकरण तर्क: पवित्र हंस को अपना वाहन बनाने वाली ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का रूढ़ नाम है।
Dinkar (Din ko karne wale arthat Surya)
व्याकरण तर्क: जो प्रभात में उदित होकर दिन का निर्माण करते हैं, वे सूर्य भगवान दिनकर कहलाते हैं।
Divakar (Diva ko karne wale arthat Surya)
व्याकरण तर्क: संसार में प्रकाश और जीवन ऊर्जा का संचार करने वाले सूर्य देव का रूढ़ पर्यायवाची है।
Pawanputra (Pawan ke putra arthat Hanuman)
व्याकरण तर्क: वायुदेव के अंश से उत्पन्न होने के कारण महावीर हनुमान जी को पवनपुत्र कहा जाता है।
Vajrapani (Vajra hai Paani mein jiske arthat Indra)
व्याकरण तर्क: दधीचि की अस्थियों से बने वज्र को हाथ में धारण करने वाले देवराज इंद्र का रूढ़ नाम है।
Sahastraksha (Sahastra hain akshiyan jiski arthat Indra)
व्याकरण तर्क: गौतम ऋषि के शाप के रूपांतरण से सहस्र नेत्र धारण करने वाले इंद्र का पौराणिक विशेषण है।
Hutashan (Hut ka ashan karne wali arthat Agni)
व्याकरण तर्क: यज्ञ में अर्पित हविष्य का भक्षण कर देवताओं तक पहुंचाने वाली अग्नि को हुताशन कहा जाता है।
Paawak (Pavitra karne wali arthat Agni)
व्याकरण तर्क: जो संपर्क में आने वाले प्रत्येक पदार्थ को भस्म कर शुद्ध कर देती है, वह पावक (अग्नि) है।
Dashanana (Das hain Aanan jiske arthat Ravana)
व्याकरण तर्क: यद्यपि पूर्व पद "दस" संख्या है, किंतु समस्त पद किसी समूह का नहीं, बल्कि तीसरे विशेष व्यक्ति (रावण) का रूढ़ नाम है।
Meghnaad (Megh ke saman naad hai jiski arthat Indrajit)
व्याकरण तर्क: जन्म लेते ही मेघ के समान भयंकर गर्जना करने के कारण रावण के ज्येष्ठ पुत्र का नाम मेघनाद पड़ा।
Kumbhakarna (Kumbh ke saman karn hain jiske arthat Kumbhakarna)
व्याकरण तर्क: घड़े जैसे विशाल कानों वाले महाबली राक्षस कुंभकर्ण का रूढ़ नाम है।
Panchanan (Paanch hain aanan jiske arthat Shiva / Singh)
व्याकरण तर्क: पाँच मुखों वाले शिव जी अथवा चौड़े मुख वाले सिंह के रूढ़ अर्थ में बहुव्रीहि समास है।
Nishachar (Nisha mein vicharan karta hai jo arthat Rakshas)
व्याकरण तर्क: रात में सक्रिय रहने वाले हिंसक राक्षस अथवा उल्लू के लिए रूढ़ अर्थ प्रकट करता है।
Ananga (Angon se rahit hai jo arthat Kamadeva)
व्याकरण तर्क: शिव जी के तीसरे नेत्र की ज्वाला में भस्म होने के बाद बिना शरीर के मन में वास करने वाले कामदेव का नाम अनंग पड़ा।
Manmath (Man ko mathne wala arthat Kamadeva)
व्याकरण तर्क: मानव मन में प्रेम और आकर्षण का मंथन करने वाले प्रेम के देवता कामदेव का रूढ़ नाम है।
Chaturanan (Chaar hain aanan jiske arthat Brahma)
व्याकरण तर्क: चार मुखों से चारों वेदों का उच्चारण करने वाले सृष्टि-सर्जक ब्रह्मा जी का रूढ़ नाम है।
Patitpawan (Patiton ko pawan karne wale arthat Ram/Ishwar)
व्याकरण तर्क: दीन-दुखियों और पापियों का उद्धार कर उन्हें पवित्र करने वाले परमपिता परमेश्वर या श्रीराम का रूढ़ बोध कराता है।
Trilokinath (Teeno lokon ke nath arthat Ishwar)
व्याकरण तर्क: आकाश, पाताल और पृथ्वी के एकछत्र स्वामी परमात्मा का रूढ़ वाचक है।
Vishdhar (Vish ko dharan karne wala arthat Saanp)
व्याकरण तर्क: विष को धारण करने वाले अन्य किसी पात्र का नहीं, बल्कि विषैले सर्प का रूढ़ बोध कराता है।
Mrigendra (Mrigon ka indra arthat Singh)
व्याकरण तर्क: जंगल के समस्त पशुओं का राजा होने के कारण सिंह को मृगेंद्र कहा जाता है।
Shakhamrig (Shakhaon ka mrig arthat Bandar)
व्याकरण तर्क: पेड़ों की डालियों पर हिरण के समान कुलांचे भरने वाले बंदर के लिए यह शब्द रूढ़ है।
Barahsingha (Barah hain seeng jiske arthat Hiran vishesh)
व्याकरण तर्क: बारह शाखाओं वाले सींगों वाले एक दुर्लभ दलदली हिरण (स्वाम्प डियर) का रूढ़ वाचक है।
Kanphata (Kaan hain phate hue jiske arthat Nath-panthi Sadhu)
व्याकरण तर्क: गोरखनाथ संप्रदाय के उन योगियों का रूढ़ बोध कराता है जो दीक्षा के समय कानों को छिदवाकर कुंडल पहनते हैं।
Anshumaalee (Anshu hain maala jiski - Surya)
व्याकरण तर्क: दोनों पदों में से कोई भी प्रधान नहीं है, अपितु दोनों मिलकर तीसरे अन्य पद "सूर्य" की ओर संकेत करते हैं।
Makaradhwaja (Makar hai dhwaja par jiske - Kamadeva)
व्याकरण तर्क: पूर्व और उत्तर दोनों पद मिलकर कामदेव (प्रेम के देवता) की ओर विशिष्ट संकेत करते हैं।
Meenaketu (Meen hai ketu par jiske - Kamadeva)
व्याकरण तर्क: दोनों पद गौण होकर तीसरे अन्य पद कामदेव का बोध कराते हैं।
Chandramauli (Chandrama hai mauli par jiske - Shiva)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चंद्र" और उत्तर पद "मौली" मिलकर अन्य पद भगवान शिव का बोध कराते हैं।
Bhalachandra (Bhal par hai chandra jiske - Shiva/Ganesh)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले विशिष्ट देव (शिव अथवा गणेश) का बोध कराते हैं।
Umapatee (Uma ke pati hain jo - Shiva)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर पार्वती जी के पति भगवान शिव की ओर संकेत करते हैं।
Shashishekhara (Shashi hai shikhar par jiske - Shiva)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर भगवान शिव की ओर लक्षणा से संकेत करते हैं।
Vyomakesha (Vyom hai kesh jiske - Shiva)
व्याकरण तर्क: आकाश रूपी जटाओं को धारण करने वाले तीसरे अन्य पद भगवान शिव का बोध होता है।
Nataraja (Naton ke raja hain jo - Shiva)
व्याकरण तर्क: तांडव नृत्य के अधिष्ठाता होने के कारण यह उपाधि भगवान शिव के लिए रूढ़ है।
Vageesha (Vaak ke eesh hain jo - Brahma/Brihaspati)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर वाणी के अधिष्ठाता देव ब्रह्मा अथवा देवगुरु बृहस्पति की ओर संकेत करते हैं।
Kamalasana (Kamal hai aasan jiska - Brahma)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर कमल पुष्प पर आसीन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का बोध कराते हैं।
Hiranyagarbha (Hiranya hai garbha jiska - Brahma)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर ब्रह्मांड के मूल कारण सुवर्णमय अंड से उत्पन्न आदिदेव ब्रह्मा का संकेत करते हैं।
Peetambaradharee (Peela vastra dharan karne wale - Krishna)
व्याकरण तर्क: पीले वस्त्र धारण करने वाले विशिष्ट रूप में श्रीकृष्ण/भगवान विष्णु का बोध होता है।
Radharamana (Radha ke sath raman karne wale - Krishna)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर तीसरे अन्य पद भगवान श्रीकृष्ण की ओर संकेत करते हैं।
Kansari (Kansa ke ari hain jo - Krishna)
व्याकरण तर्क: अत्याचारी कंस का संहार करने वाले तीसरे अन्य पद भगवान श्रीकृष्ण का बोध होता है।
Vasudeva (Vasudev ke putra - Krishna)
व्याकरण तर्क: वसुदेव के सुपुत्र होने के कारण यह संज्ञा भगवान श्रीकृष्ण के लिए रूढ़ है।
Haladhara (Hal ko dharan karne wale - Balaram)
व्याकरण तर्क: हल को शस्त्र रूप में धारण करने वाले तीसरे अन्य पद बलराम जी का बोध होता है।
Madanmohana (Madan ko mohit karne wale - Krishna)
व्याकरण तर्क: कामदेव के अभिमान को भंग कर उसे भी अपनी सुंदरता से मोहित करने वाले श्रीकृष्ण का बोध होता है।
Gopinatha (Gopiyon ke nath - Krishna)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर गोपियों के परम आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की ओर विशिष्ट संकेत करते हैं।
Kaushalyanandana (Kaushalya ke nandan - Rama)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर माता कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र भगवान श्रीराम का बोध कराते हैं।
Raghupatee (Raghu kul ke pati - Rama)
व्याकरण तर्क: रघुकुल के शिरोमणि के रूप में यह पद भगवान श्रीराम के लिए रूढ़ है।
Janakeenatha (Janaki ke nath - Rama)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर माता सीता के पति मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का बोध कराते हैं।
Kharari (Khara ke ari - Rama)
व्याकरण तर्क: दंडकारण्य में खर-दूषण का वध करने वाले तीसरे अन्य पद भगवान श्रीराम का बोध होता है।
Lankapati (Lanka ke pati - Ravana)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर स्वर्ण लंका के शासक रावण की ओर संकेत करते हैं।
Dashagreeva (Das hain greevaayein jiski - Ravana)
व्याकरण तर्क: दस गर्दनों/मुखों वाले तीसरे अन्य पद लंकाधिपति रावण का बोध होता है।
Maarutee (Marut ke putra - Hanuman)
व्याकरण तर्क: पवनदेव के तेज से उत्पन्न होने के कारण यह उपाधि हनुमान जी के लिए रूढ़ है।
Anjaneeputra (Anjani ke putra - Hanuman)
व्याकरण तर्क: माता अंजनी के तेजस्वी सुपुत्र भगवान हनुमान जी का बोध कराने वाला बहुव्रीहि पद है।
Sooryaputra (Surya ke putra - Karna/Yamraj)
व्याकरण तर्क: सूर्यदेव के तेज से उत्पन्न महादानी कर्ण अथवा धर्मराज यम का संकेत करने वाला बहुव्रीहि समास है।
Dhananjaya (Dhan ko jeetne wale - Arjuna)
व्याकरण तर्क: राजसूय यज्ञ के लिए दिग्विजय कर धन जीतने वाले पांडुपुत्र अर्जुन का बोध होता है।
Gandeevadharee (Gandeeva dharan karne wale - Arjuna)
व्याकरण तर्क: अग्निदेव द्वारा प्रदत्त गांडीव धनुष चलाने वाले तीसरे अन्य पद अर्जुन का बोध होता है।
Parthasarathi (Partha ke sarathi - Krishna)
व्याकरण तर्क: महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ के सारथि बनने वाले भगवान श्रीकृष्ण का बोध होता है।
Dharmaraja (Dharma ke raja - Yudhishthira/Yama)
व्याकरण तर्क: सत्य और न्याय की मर्यादा का पालन करने वाले ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर अथवा यमराज का बोध होता है।
Vrikodara (Vrik ke saman udar jiska - Bhima)
व्याकरण तर्क: तीव्र जठराग्नि और विशाल क्षुधा वाले द्वितीय पांडव भीमसेन के लिए यह पद रूढ़ है।
Shatakratu (Sau yajna kiye hain jisne - Indra)
व्याकरण तर्क: सौ महान अश्वमेध यज्ञ पूर्ण कर अमरावती का सिंहासन प्राप्त करने वाले देवराज इंद्र का बोध होता है।
Amarapati (Amaron ke pati - Indra)
व्याकरण तर्क: स्वर्गलोक के अमर देवताओं के अधिपति देवराज इंद्र का बोध कराने वाला बहुव्रीहि पद है।
Devaraja (Devon ke raja - Indra)
व्याकरण तर्क: देवताओं के शासक के रूप में यह पद देवराज इंद्र के लिए रूढ़ है।
Dhanada (Dhan ko dene wale - Kubera)
व्याकरण तर्क: धन और समृद्धियों के कोषाध्यक्ष देव कुबेर का बोध कराने वाला बहुव्रीहि समास है।
Yaksharaja (Yakshon ke raja - Kubera)
व्याकरण तर्क: अलकापुरी के अधिपति और यक्षों के अधिराज कुबेर का बोध होता है।
Shailasuta (Shaila ki suta - Parvati)
व्याकरण तर्क: पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण यह उपाधि भगवती पार्वती के लिए रूढ़ है।
Girija (Giri se utpanna - Parvati)
व्याकरण तर्क: हिमालय पर्वत से जन्म लेने के कारण देवी पार्वती को गिरिजा कहा जाता है।
Patajhad (Jhadte hain patte jis ritu mein - Autumn)
व्याकरण तर्क: वृक्षों के पत्ते झड़ने की क्रिया से एक विशिष्ट मौसम/ऋतु (शरद-शिशिर) का बोध होता है।
Jitendriya (Jeet li hain indriyan jisne - Sanyasi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर अपनी समस्त ज्ञानेंद्रियों पर पूर्ण संयम रखने वाले प्रबुद्ध साधक का बोध कराते हैं।
Kritakarya (Krit kar liya hai karya jisne - Safal vyakti)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर अपने अभीष्ट उद्देश्य को सफलतापूर्वक सिद्ध कर चुके व्यक्ति की ओर संकेत करते हैं।
Sulochana (Sundar hain lochan jiske - Meghnada's wife)
व्याकरण तर्क: सुंदर नेत्रों वाली स्त्री अथवा पौराणिक संदर्भ में मेघनाद की सती पत्नी का बोध होता है।