व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय है जिसका अर्थ "के अनुसार" है। "यथा" के योग से समस्त पद क्रिया-विशेषण अव्यय बन गया है।
अव्ययीभाव समास
Avyayibhav Samas (Adverbial Compound)
First element (Purva-pada) is dominant
परिभाषा एवं स्वरूप (Definition & Concept)
जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) अव्यय या उपसर्ग हो तथा वही पद प्रधान हो, और समस्त पद मिलकर क्रिया-विशेषण अव्यय की भांति कार्य करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
A compound in which the first element is an indeclinable word (avyaya) or prefix that functions as the head of the compound, turning the entire compound into an adverbial expression.
अव्ययीभाव समास के प्रमुख उपभेद व नियम
1. उपसर्गयुक्त अव्ययीभाव
यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, निस्/निर्, बा आदि उपसर्गPrefix-based Avyayibhav
जब पहला पद कोई अव्यय उपसर्ग हो और वह उत्तर पद के अर्थ को मर्यादित या आवृत्त करे।
2. पुनरुक्त / द्विरुक्ति अव्ययीभाव
एक ही संज्ञा या क्रिया विशेषण शब्द की दोहराव (द्विरुक्ति)Reduplicative Avyayibhav
जब एक ही सार्थक शब्द की आवृत्ति होकर समस्त पद क्रिया-विशेषण अव्यय बन जाता है।
पहचान की अचूक ट्रिक (Instant Shortcut Method)
शब्द के आरंभ में यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, हर, नि: उपसर्ग देखें; अथवा एक ही शब्द दो बार जुड़ा हो (जैसे रातोंरात, कानोंकान)। समस्त पद का लिंग, वचन या कारक के आधार पर रूप नहीं बदलता।
Look for common adverbial prefixes at the start: yatha-, prati-, aa-, anu-, bhar-, be-, har-; or exact word reduplication like raton-raat, kanon-kaan. The compound remains invariant in gender and number.
सामान्य भ्रम एवं सावधानियाँ (Common Pitfalls & Exam Traps)
- द्विरुक्त शब्दों (जैसे "हाथोंहाथ", "पल-पल") को योजक चिह्न देखकर द्वंद्व समास समझने की भूल करना; द्वंद्व में दोनों पद भिन्न और स्वतंत्र होते हैं, जबकि यहाँ एक ही शब्द की आवृत्ति से अव्यय बनता है।
- उपसर्ग वाले हर शब्द को अव्ययीभाव मान लेना; यदि उपसर्ग विशेषण का कार्य करे (जैसे "सुपुत्र" = अच्छा पुत्र), तो वह कर्मधारय समास होता है।
परीक्षा विशेष टिप्स (Board & Competitive Exam Notes)
कक्षा 9-10 बोर्ड परीक्षा में "यथाशक्ति", "प्रतिदिन", "आजन्म" और "रातोंरात" सबसे अधिक पूछे जाने वाले उदाहरण हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में द्विरुक्ति वाले अव्ययीभाव पर विशेष प्रश्न आते हैं।
अव्ययीभाव समास के प्रमुख सामासिक पद व विग्रह (114)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय कालवाचक संज्ञा "समय" के साथ जुड़कर सामयिक क्रिया-विशेषण का निर्माण करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय है और उत्तर पद "मति" (बुद्धि) है। समस्त पद अपनी बौद्धिक क्षमतानुसार कार्य करने का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: "यथा" अव्यय के प्रभाव से समस्त पद रुचि के अनुकूल कार्य करने का अव्यय रूप प्रकट करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय "क्रम" संज्ञा के साथ मिलकर क्रमानुसार व्यवस्था का क्रिया-विशेषण बनाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय विधिपूर्वक कार्य संपादन का बोध कराता है, अतः अव्ययीभाव समास है।
यथासंभव
Yethasambhav (Jaisa Sambhav ho)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय संभावना की सीमा का निर्धारण करता है और समस्त पद क्रिया-विशेषण बनता है।
यथायोग्य
Yethayogya (Yogyata ke Anusar)
व्याकरण तर्क: "यथा" अव्यय योग्यता के मापदंड का वाचक है और संपूर्ण पद क्रिया-विशेषण अव्यय की भांति कार्य करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय उपसर्ग है जो प्रत्येक दिन की आवृत्ति का बोध कराता है। संपूर्ण पद कालवाचक अव्यय है।
व्याकरण तर्क: "प्रति" उपसर्ग वार्षिक पुनरावृत्ति का वाचक है और समस्त पद अव्यय रूप में स्थित रहता है।
व्याकरण तर्क: "प्रति" अव्यय मासिक आवृत्ति का बोध कराता है, जिससे समस्त पद का लिंग-वचन अपरिवर्तनीय रहता है।
व्याकरण तर्क: "प्रति" अव्यय समय के सूक्ष्म अंश (क्षण) की आवृत्ति का बोध कराकर समस्त पद को अव्यय बनाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" के योग से "पल" संज्ञा क्रिया-विशेषण अव्यय में रूपांतरित हो गई है।
व्याकरण तर्क: प्रति + अक्षि की संधि से बना "प्रत्यक्ष" पद आँखों के सामने उपस्थित होने का क्रिया-विशेषण अव्यय है।
व्याकरण तर्क: पर + अक्षि के मेल से बना "परोक्ष" आँखों से परे (अदृश्य) अवस्था का बोध कराने वाला अव्ययीभाव पद है।
प्रत्युपकार
Pratyupkar (Upakar ke badle Upakar)
व्याकरण तर्क: प्रति + उपकार में "प्रति" अव्यय "बदले में" का अर्थ देता है, जिससे समस्त पद अव्ययीभाव बनता है।
प्रतिध्वनि
Pratidhvani (Dhvani ke baad Dhvani)
व्याकरण तर्क: "प्रति" उपसर्ग मूल ध्वनि के पश्चात् उत्पन्न होने वाली परावर्तित ध्वनि का बोधक है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" अव्यय मर्यादा या सीमा ("से लेकर / तक") का बोध कराता है और समस्त पद अव्यय बन जाता है।
व्याकरण तर्क: "आ" अव्यय मृत्यु की सीमा तक का अर्थ देता है, जिससे यह क्रिया-विशेषण अव्यय बनता है।
व्याकरण तर्क: "आ" अव्यय जीवन की संपूर्ण अवधि का द्योतक है और समस्त पद अव्यय की भांति प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: "आ" अव्यय शारीरिक सीमा (कंठ तक) को व्यक्त करता है, जिससे पद क्रिया-विशेषण बन जाता है।
आपादमस्तक
Aapadamastak (Pair se lekar Mastak tak)
व्याकरण तर्क: "आ" अव्यय संपूर्ण शरीर की सीमा (पैर से सिर तक) का द्योतन करता है।
आबालवृद्ध
Aabaalavriddha (Balak se lekar Vriddha tak)
व्याकरण तर्क: "आ" उपसर्ग आयु सीमा (बालक से वृद्ध) के समस्त समूह का बोध कराने वाला अव्ययीभाव पद बनाता है।
व्याकरण तर्क: "आ" उपसर्ग समय के महा-युग (कल्प) की सीमा तक का अर्थ प्रदान करता है।
व्याकरण तर्क: "आ" अव्यय भौगोलिक सीमा (समुद्र तक) का द्योतक है, जिससे समस्त पद अव्ययीभाव बनता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" अव्यय योग्यता या सादृश्य ("के अनुसार") का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: "अनु" अव्यय अनुकूलता और सामंजस्य का बोध कराता है, जिससे समस्त पद अव्यय बन जाता है।
व्याकरण तर्क: "अनु" उपसर्ग क्रम और निरंतरता का वाचक है, जिससे समस्त पद अव्यय बन जाता है।
अनुगमन
Anugaman (Gaman ke peeche Gaman)
व्याकरण तर्क: "अनु" अव्यय पश्चात्वर्ती क्रिया (पीछे चलना) का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "भर" एक अव्यय है जो पूर्णता और तृप्ति का बोध कराता है। समस्त पद रीतिवाचक क्रिया-विशेषण है।
व्याकरण तर्क: "भर" अव्यय अधिकता और प्रचुरता को दर्शाते हुए समस्त पद को क्रिया-विशेषण बनाता है।
व्याकरण तर्क: "भर" अव्यय संपूर्ण सामर्थ्य के विनियोग का द्योतक है, अतः अव्ययीभाव समास है।
व्याकरण तर्क: "भर" अव्यय के प्रभाव से समस्त पद प्रचुरता और अतिरेक का वाचक बन जाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बे" एक निषेधार्थक अव्यय उपसर्ग है जिसका अर्थ "बिना" है। समस्त पद अव्यय बन गया है।
व्याकरण तर्क: "बे" अव्यय उपसर्ग "काम" संज्ञा के साथ मिलकर क्रिया-विशेषण अव्यय बनाता है।
व्याकरण तर्क: "बे" उपसर्ग के प्रभाव से समस्त पद नाम-रहित अवस्था का अव्यय रूप व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: "बे" उपसर्ग भय या संकोच के अभाव को सूचित करते हुए रीतिवाचक अव्यय बनाता है।
व्याकरण तर्क: "बे" उपसर्ग दया के अभाव को सूचित करता है, जिससे पद का रूप अव्यय की भांति व्यवहार करता है।
व्याकरण तर्क: "बे" उपसर्ग चिंता या फिक्र के अभाव को दर्शाकर रीतिवाचक अव्यय का निर्माण करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बा" अव्यय उपसर्ग है जिसका अर्थ "के अनुसार/सहित" है। समस्त पद क्रिया-विशेषण है।
व्याकरण तर्क: "बा" उपसर्ग सम्मान सहित कार्य करने की रीति को व्यक्त करते हुए अव्यय बनाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दर" अव्यय उपसर्ग है जिसका अर्थ "में" है। "दरअसल" क्रिया-विशेषण अव्यय है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "हर" अव्यय प्रत्येक का वाचक है जो समय की निरंतरता को दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: "हर" अव्यय दैनिक पुनरावृत्ति का बोध कराता है और संपूर्ण पद कालवाचक अव्यय है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "निर्" अव्यय उपसर्ग है जो भय के अभाव को प्रकट कर क्रिया-विशेषण बनाता है।
व्याकरण तर्क: "निर्" उपसर्ग विवाद-रहित स्थिति का बोध कराता है और समस्त पद अव्यय रूप में स्थित रहता है।
व्याकरण तर्क: "निर्" उपसर्ग दोष-रहित अवस्था का द्योतक है जो समस्त पद को अव्यय बनाता है।
व्याकरण तर्क: "निस्" उपसर्ग संदेह के अभाव को दृढ़तापूर्वक प्रकट करने वाला अव्यय पद बनाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नि" हिंदी का अव्यय उपसर्ग है जो डर के अभाव का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: "रात" संज्ञा शब्द की द्विरुक्ति (दोहराव) होकर समस्त पद कालवाचक क्रिया-विशेषण अव्यय बन गया है।
व्याकरण तर्क: "दिन" शब्द की द्विरुक्ति से समय के निरंतर प्रवाह का द्योतन करने वाला अव्ययीभाव पद बनता है।
हाथोंहाथ
Hathonhaath (Hath hi Hath mein)
व्याकरण तर्क: "हाथ" शब्द की आवृत्ति शीघ्रता और त्वरित आदान-प्रदान का क्रिया-विशेषण अव्यय बनाती है।
कानोंकान
Kanonkaan (Kaan hi Kaan mein)
व्याकरण तर्क: "कान" शब्द की आवृत्ति से गोपनीय रूप से सूचना संचरण का अव्ययीभाव पद बनता है।
बीचोंबीच
Beechonbeech (Theek beech mein)
व्याकरण तर्क: "बीच" शब्द की द्विरुक्ति से स्थानवाचक क्रिया-विशेषण अव्यय का निर्माण होता है।
धड़ाधड़
Dhadadhad (Dhad-dhad ki aawaz ke saath)
व्याकरण तर्क: ध्वन्यात्मक शब्द "धड़" की पुनरावृत्ति से तीव्र गतिसूचक रीतिवाचक अव्यय बनता है।
व्याकरण तर्क: "पल" शब्द की पुनरुक्ति यद्यपि योजक चिह्न के साथ है, पर एक ही शब्द होने से अव्ययीभाव समास है।
व्याकरण तर्क: "घड़ी" शब्द की आवृत्ति से बारंबार होने वाली क्रिया का अव्यय रूप बनता है।
व्याकरण तर्क: एक ही सार्थक संज्ञा "घर" की आवृत्ति से स्थानवाचक क्रिया-विशेषण अव्यय बनता है।
द्वार-द्वार
Dwar-dwar (Pratyek dwar par)
व्याकरण तर्क: "द्वार" शब्द की द्विरुक्ति से हर दरवाजे पर जाने का क्रिया-विशेषण अव्यय बनता है।
व्याकरण तर्क: विशेषण "साफ" की आवृत्ति से रीतिवाचक क्रिया-विशेषण अव्यय बनता है।
व्याकरण तर्क: क्रिया-विशेषण पद "धीरे" की द्विरुक्ति से गति की मंदता का बोध कराने वाला अव्ययीभाव पद बनता है।
यथास्थान
Yathasthana (Sthan ke anusar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय है और उत्तर पद के साथ मिलकर समस्त पद क्रियाविशेषण अव्यय बन गया है।
यथासामर्थ्य
Yathasamarthya (Samarthya ke anusar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "यथा" अव्यय प्रधान है और सामर्थ्य के अनुपात में कार्य करने का बोध कराता है।
यथासाध्य
Yathasadhya (Jitna sadha ja sake)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय प्रधान है जो साध्यता की सीमा के अनुसार अर्थ देता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय है और संधि होकर "यथेच्छा" पद अव्यय बन गया है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय प्रधान है तथा इच्छित मात्रा के अनुरूप क्रियाविशेषण अर्थ देता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "यथा" अव्यय प्रधान है और शास्त्रोक्त विधि के पालन का भाव व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "यथा" अव्यय है और नियमों की अनुपालना के क्रियाविशेषण रूप में प्रयुक्त है।
यथासंक्षेप
Yathasankshepa (Sankshep ke anusar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "यथा" अव्यय है तथा उत्तर पद के साथ संक्षेप में प्रस्तुत करने की रीति बताता है।
प्रतिकार
Pratikara (Kaar ke badle kaar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" उपसर्ग अव्यय प्रधान है और विपरीत प्रतिकारी भाव व्यक्त करता है।
प्रतिहिंसा
Pratihimsa (Himsa ke badle himsa)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय प्रधान है जो हिंसा के बदले की जाने वाली प्रतिशोधी हिंसा को दर्शाता है।
प्रत्युत्तर
Pratyuttara (Uttar ke badle uttar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय है और यण् संधि होकर समस्त पद प्रत्युत्तर (उत्तर के बदले उत्तर) बन गया है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "प्रति" अव्यय प्रत्येक के अर्थ में आवृत्ति को व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय प्रधान है जो प्रत्येक व्यक्ति की इकाईगत गणना को दर्शाता है।
प्रतिघात
Pratighata (Ghaat ke badle ghaat)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय है और प्रहार के बदले किए जाने वाले जवाबी प्रहार को सूचित करता है।
प्रतिपक्ष
Pratipaksha (Paksha ke viparit paksha)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" विपरीतता के अर्थ में अव्यय रूप में प्रयुक्त हुआ है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रति" अव्यय है और प्रत्येक घर में होने वाली व्यापकता को प्रकट करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" सीमाबोधक अव्यय है और सिर से पैर तक संपूर्ण देह की व्याप्ति बताता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "आ" अव्यय है जो किसी विषय की जड़ या मूल तक की सीमा को सूचित करता है।
आमूलचूल
Aamoolachoola (Mool se lekar chool tak)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" जड़ से चोटी तक की समग्रता को व्यक्त करने वाला अव्यय पद है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" सीमावाचक अव्यय है और छोटे बालकों तक के विस्तार को व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "आ" मर्यादा/सीमाबोधक अव्यय है और पैरों तक की सीमा को सूचित करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" सीमावाचक अव्यय है और धनुष की प्रत्यंचा को कान तक खींचने की क्रिया को दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "आ" अव्यय है और साधारण चरवाहों/गोपालों तक की व्यापकता को बताता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" उपसर्ग अव्यय प्रधान है जो अनुरूपता का बोध कराता है।
अनुकरण
Anukarana (Karan ke peechhe karan)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" अव्यय है और किसी कार्य का अनुसरण करने की क्रिया को दर्शाता है।
अनुशासन
Anushasana (Shasan ke anusar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "अनु" उपसर्ग अव्यय है जो व्यवस्था और नियमों के अनुरूप चलने का भाव व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" अव्यय प्रत्येक के अर्थ में प्रयुक्त होकर क्षण-क्षण की निरंतरता को बताता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" अव्यय है और कदम-कदम पर होने वाली निरंतरता को क्रियाविशेषण बनाता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "अनु" अव्यय है और व्यवस्थित सिलसिलेवार क्रम के अनुसार अर्थ देता है।
अनुवाद
Anuvada (Vaad ke peechhe vaad)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अनु" अव्यय है जो मूल कथन के पश्चात दूसरे रूप में कहने की प्रक्रिया दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बे" (बिना/रहित) फारसी उपसर्ग अव्यय है और ईमान के अभाव को व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "बे" अव्यय है जो दोषरहित होने का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बे" अव्यय है और पर्दे या रहस्य के खुल जाने का भाव व्यक्त करता है।
बेमिसाल
Bemisal (Misaal ke bina)
व्याकरण तर्क: पहला पद "बे" अव्यय है जो अनुपमेयता या अद्वितीयता का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बे" अव्यय है और प्रभावशून्यता को प्रकट करता है।
बेफिक्र
Befikra (Fikra ke bina)
व्याकरण तर्क: पहला पद "बे" अव्यय है और चिंतामुक्त होने की मानसिक अवस्था को दर्शाता है।
बेदर्द
Bedarda (Dard ke bina)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बे" अव्यय है और दया अथवा संवेदना के अभाव को व्यक्त करता है।
बदौलत
Badaulat (Daulat ke sath/kripa se)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "ब" (सहित/द्वारा) अव्यय है और किसी के अनुग्रह से कार्य संपन्न होने का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "ब" अव्यय है और स्वयं अपनी लेखनी से लिखने का क्रियाविशेषण भाव देता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बा" (सहित) अव्यय है और शिष्टाचारयुक्त आचरण को प्रकट करता है।
बामुलाहिज़ा
Bamulahiza (Mulahiza ke sath)
व्याकरण तर्क: पहला पद "बा" अव्यय है और पूर्ण आदर व शिष्टाचार के साथ उपस्थित होने का भाव व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "निर्" उपसर्ग अव्यय है और समस्त पद क्रियाविशेषण अव्यय रूप में प्रयुक्त है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "निर्" अव्यय है जो किसी कार्य के बिना रुकावट पूर्ण होने की रीति बताता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "निर्" अव्यय है और मलिनता से रहित शुद्धता का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "निर्" अव्यय है और मानव उपस्थिति के अभाव को दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "निस्" अव्यय है जो छल-कपट से रहित शुद्ध आचरण को प्रकट करता है।
मारामारी
Maramari (Maar ke baad maar)
व्याकरण तर्क: एक ही शब्द की पुनरावृत्ति से परस्पर आक्रामक क्रिया का क्रियाविशेषण अव्यय रूप बना है।
कानाफूसी
Kanafusi (Kaan hi kaan mein fusfusahat)
व्याकरण तर्क: दोनों पदों के संयोजन से कान में चुपके-चुपके बात करने की रीतिवाचक क्रियाविशेषण निष्पन्न हुआ है।
फटाफट
Phataphata (Sheeghrata ke sath)
व्याकरण तर्क: ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति से निर्मित अव्यय पद है जो तीव्रता और शीघ्रता की रीति बताता है।
खटाखट
Khatakhata (Nirantarata ke sath)
व्याकरण तर्क: ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति से बना पद क्रियाविशेषण अव्यय के रूप में प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: संज्ञा पद की द्विरुक्ति से संपूर्ण व्याप्तिबोधक अव्ययीभाव समस्त पद बना है।
व्याकरण तर्क: संज्ञा पद "नगर" की आवृत्ति से क्रियाविशेषण अव्ययीभाव पद का निर्माण हुआ है।
व्याकरण तर्क: पद की द्विरुक्ति से समस्त पद अव्ययीभाव क्रियाविशेषण बन गया है।