Manaveekaran (Personification) — लक्षण, परिभाषा व उदाहरणमानवीकरण अलंकार
उच्चारण व लिपि: Manaveekaran Alankar
काव्य में जहाँ जड़ (अचेतन) प्रकृति, पेड़-पौधों, बादलों, ऋतुओं या निर्जीव वस्तुओं पर मानव की चेतना, क्रियाओं, भावनाओं या व्यवहार का आरोप किया जाता है (उन्हें मनुष्य की तरह कार्य करते दिखाया जाए), वहाँ "मानवीकरण अलंकार" होता है।
प्रकृति के तत्वों (फूल, बादल, नदी, हवा, रात) को हंसते, रोते, सजते, चलते या बातें करते दिखाया जाना।
Tip in English: Nature elements (clouds, flowers, twilight) depicted laughing, weeping, dressing, or dancing.
"मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।"
काव्यशास्त्रीय विश्लेषण (Literary Explanation):
यहाँ बादलों (निर्जीव प्रकृति) को किसी मेहमान (दामाद) की तरह सज-धजकर और संवरकर आने के मानवीय क्रियाकलाप से युक्त दिखाया गया है।
Analysis in English: Clouds (natural inanimate entities) are depicted dressing up and grooming themselves like visiting human guests.
अन्य प्रसिद्ध काव्य दोहे एवं उदाहरण
"दिवसावसान का समय, मेघमय आसमान से उतर रही है वह संध्या-सुंदरी परी-सी धीरे-धीरे-धीरे।"
यहाँ शाम की बेला (संध्या) को एक सुंदर परी के रूप में आसमान से हौले-हौले उतरते हुए मानवीय रूप प्रदान किया गया है।
Evening twilight is personified as a celestial nymph gliding down gracefully from overcast skies.
"फूल हँसे कलियाँ मुसकाईं। जागीं वनस्पतियाँ अलसाईं॥"
फूलों और कलियों का मनुष्य की तरह हँसना और मुस्कुराना तथा वनस्पतियों का अंगड़ाई लेकर जागना मानवीकरण है।
Blossoms laughing, buds smiling, and drowsy plants stretching awake like humans portrays personification.
समान श्रेणी के अन्य प्रमुख अलंकार (अर्थालंकार)
सभी अर्थालंकार देखें →उपमा अलंकार
Upama (Simile)
जहाँ किसी वस्तु या प्राणी के गुण, रूप, स्वभाव या सौंदर्य की समानता किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है, वहाँ "उपमा अलंकार" होता है। उपमा के चार अनिवार्य अंग होते हैं: 1. उपमेय (जिसकी तुलना हो), 2. उपमान (जिससे तुलना की जाए), 3. साधारण धर्म (समान गुण), और 4. वाचक शब्द (सा, सी, से, सम, सरिस, सदृश, जैसा)।
"पीपर पात सरिस मन डोला।"
यहाँ मानव मन की चंचलता की तुलना पीपल के हिलते हुए पत्ते से की गई है। उपमेय: "मन", उपमान: "पीपर पात", साधारण धर्म: "डोला (हिलना/चंचल होना)", और वाचक शब्द: "सरिस"। चारों अंग उपस्थित होने से यह पूर्णोपमा अलंकार है।
रूपक अलंकार
Rupaka (Metaphor)
जहाँ गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोप (दोनों को एक ही मान लेना) कर दिया जाता है और कोई वाचक शब्द (सा, सी) नहीं होता, वहाँ "रूपक अलंकार" होता है। इसमें तुलना न करके उपमेय को ही उपमान का रूप दे दिया जाता है।
"चरन कमल बंदौ हरिराई।"
यहाँ भगवान के चरणों (उपमेय) में कमल (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है। यह नहीं कहा गया कि "चरण कमल जैसे हैं", बल्कि चरणों को ही सीधे "कमल" कह दिया गया है।
उत्प्रेक्षा अलंकार
Utpreksha (Poetic Fancy / Conceit)
जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ "उत्प्रेक्षा अलंकार" होता है। इसमें किसी वस्तु को देखकर ऐसा लगता है मानो वह कोई दूसरी सुंदर वस्तु हो। इसके प्रमुख वाचक शब्द हैं: जनु, मनु, जानो, मानो, जनहुँ, मनहुँ, निश्चय, इव।
"सोहत ओढ़ै पीत पट स्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर आतप पर्यो प्रभात॥"
श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीले वस्त्र देखकर ऐसी संभावना की गई है "मानो" नीलमणि पर्वत पर प्रातःकालीन सुनहरी धूप पड़ रही हो। "मनहुँ" वाचक शब्द से उत्प्रेक्षा स्पष्ट है।