Atishayokti (Hyperbole) — लक्षण, परिभाषा व उदाहरणअतिशयोक्ति अलंकार
उच्चारण व लिपि: Atishayokti Alankar
काव्य में जहाँ किसी वस्तु, व्यक्ति, घटना या स्थिति का वर्णन लोक-सीमा अथवा वास्तविकता से बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए, वहाँ "अतिशयोक्ति अलंकार" होता है। (अतिशय + उक्ति = अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात)।
घटना या कार्य का परिणाम कारण से पहले ही घटित दिखाया जाए या असंभव सीमा तक वर्णन हो।
Tip in English: Look for impossible feats or consequences occurring even before the preliminary cause transpires.
"हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग॥"
काव्यशास्त्रीय विश्लेषण (Literary Explanation):
यहाँ हनुमान जी की पूंछ में आग लगने से पहले ही संपूर्ण लंका के जल जाने और राक्षसों के भाग जाने का अस्वाभाविक बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है।
Analysis in English: It exaggerates that even before fire caught Hanuman's tail, the entire city of Lanka was already reduced to ashes.
अन्य प्रसिद्ध काव्य दोहे एवं उदाहरण
"आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार॥"
राणा प्रताप के नदी किनारे सोचते-सोचते ही चेतक का नदी पार कर जाना लोक-सीमा से परे का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है।
Before Maharana Pratap could even finish pondering how to cross the roaring river, his horse Chetak was already on the other bank.
"धनुष उठाया ज्यों ही उसने और चढ़ाया उस पर बाण। धरा-सिंधु नभ काँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण॥"
धनुष उठाते ही संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सागर का कांप उठना अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर किया गया शौर्य-वर्णन है।
The entire universe and oceans trembling the instant a hero lifts his bow is an illustrative hyperbolic device.
समान श्रेणी के अन्य प्रमुख अलंकार (अर्थालंकार)
सभी अर्थालंकार देखें →उपमा अलंकार
Upama (Simile)
जहाँ किसी वस्तु या प्राणी के गुण, रूप, स्वभाव या सौंदर्य की समानता किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है, वहाँ "उपमा अलंकार" होता है। उपमा के चार अनिवार्य अंग होते हैं: 1. उपमेय (जिसकी तुलना हो), 2. उपमान (जिससे तुलना की जाए), 3. साधारण धर्म (समान गुण), और 4. वाचक शब्द (सा, सी, से, सम, सरिस, सदृश, जैसा)।
"पीपर पात सरिस मन डोला।"
यहाँ मानव मन की चंचलता की तुलना पीपल के हिलते हुए पत्ते से की गई है। उपमेय: "मन", उपमान: "पीपर पात", साधारण धर्म: "डोला (हिलना/चंचल होना)", और वाचक शब्द: "सरिस"। चारों अंग उपस्थित होने से यह पूर्णोपमा अलंकार है।
रूपक अलंकार
Rupaka (Metaphor)
जहाँ गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोप (दोनों को एक ही मान लेना) कर दिया जाता है और कोई वाचक शब्द (सा, सी) नहीं होता, वहाँ "रूपक अलंकार" होता है। इसमें तुलना न करके उपमेय को ही उपमान का रूप दे दिया जाता है।
"चरन कमल बंदौ हरिराई।"
यहाँ भगवान के चरणों (उपमेय) में कमल (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है। यह नहीं कहा गया कि "चरण कमल जैसे हैं", बल्कि चरणों को ही सीधे "कमल" कह दिया गया है।
उत्प्रेक्षा अलंकार
Utpreksha (Poetic Fancy / Conceit)
जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ "उत्प्रेक्षा अलंकार" होता है। इसमें किसी वस्तु को देखकर ऐसा लगता है मानो वह कोई दूसरी सुंदर वस्तु हो। इसके प्रमुख वाचक शब्द हैं: जनु, मनु, जानो, मानो, जनहुँ, मनहुँ, निश्चय, इव।
"सोहत ओढ़ै पीत पट स्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर आतप पर्यो प्रभात॥"
श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीले वस्त्र देखकर ऐसी संभावना की गई है "मानो" नीलमणि पर्वत पर प्रातःकालीन सुनहरी धूप पड़ रही हो। "मनहुँ" वाचक शब्द से उत्प्रेक्षा स्पष्ट है।