Anyokti (Allegory / Indirect Address) — लक्षण, परिभाषा व उदाहरणअन्योक्ति अलंकार
उच्चारण व लिपि: Anyokti Alankar
काव्य में जहाँ अप्रस्तुत (जो सामने नहीं है या प्रतीकात्मक विषय) के माध्यम से प्रस्तुत (जो वास्तविक लक्षित व्यक्ति या विषय है) का अप्रत्यक्ष रूप से वर्णन किया जाए, वहाँ "अन्योक्ति अलंकार" होता है। (अन्य + उक्ति = किसी अन्य के बहाने कही गई बात)।
प्रतीकात्मक जीवों (जैसे भौंरा, हंस, काग, माली, गुलाब) के माध्यम से मनुष्य या शासक को सीख दी जाना।
Tip in English: Animal/nature allegories (bee, swan, gardener, rose) masking a pointed political or moral lesson.
"नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहिं काल। अली कली ही सौं बंध्यौ, आगे कौन हवाल॥"
काव्यशास्त्रीय विश्लेषण (Literary Explanation):
बिहारीलाल जी ने भौंरे और कली के अप्रस्तुत प्रसंग के माध्यम से नवविवाहिता रानी के प्रेम में राजकाज भूल चुके राजा जयसिंह (प्रस्तुत) को कर्तव्य का बोध कराने हेतु यह अन्योक्ति कही थी।
Analysis in English: Bihari addresses a bee engrossed in an unopened bud as an allegorical veil to admonish King Jaisingh who was neglecting state duties for his bride.
अन्य प्रसिद्ध काव्य दोहे एवं उदाहरण
"माली आवत देखकर कलियन करी पुकार। फूले-फूले चुन लिए, काल्हि हमारी बार॥"
माली (यमराज/काल), फूल (वृद्धजन) और कलियों (युवाओं) के माध्यम से जीवन की नश्वरता का मर्मस्पर्शी संदेश दिया गया है।
The gardener plucking blossoms allegorizes death claiming the elderly today and the youth tomorrow.
समान श्रेणी के अन्य प्रमुख अलंकार (अर्थालंकार)
सभी अर्थालंकार देखें →उपमा अलंकार
Upama (Simile)
जहाँ किसी वस्तु या प्राणी के गुण, रूप, स्वभाव या सौंदर्य की समानता किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है, वहाँ "उपमा अलंकार" होता है। उपमा के चार अनिवार्य अंग होते हैं: 1. उपमेय (जिसकी तुलना हो), 2. उपमान (जिससे तुलना की जाए), 3. साधारण धर्म (समान गुण), और 4. वाचक शब्द (सा, सी, से, सम, सरिस, सदृश, जैसा)।
"पीपर पात सरिस मन डोला।"
यहाँ मानव मन की चंचलता की तुलना पीपल के हिलते हुए पत्ते से की गई है। उपमेय: "मन", उपमान: "पीपर पात", साधारण धर्म: "डोला (हिलना/चंचल होना)", और वाचक शब्द: "सरिस"। चारों अंग उपस्थित होने से यह पूर्णोपमा अलंकार है।
रूपक अलंकार
Rupaka (Metaphor)
जहाँ गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोप (दोनों को एक ही मान लेना) कर दिया जाता है और कोई वाचक शब्द (सा, सी) नहीं होता, वहाँ "रूपक अलंकार" होता है। इसमें तुलना न करके उपमेय को ही उपमान का रूप दे दिया जाता है।
"चरन कमल बंदौ हरिराई।"
यहाँ भगवान के चरणों (उपमेय) में कमल (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है। यह नहीं कहा गया कि "चरण कमल जैसे हैं", बल्कि चरणों को ही सीधे "कमल" कह दिया गया है।
उत्प्रेक्षा अलंकार
Utpreksha (Poetic Fancy / Conceit)
जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ "उत्प्रेक्षा अलंकार" होता है। इसमें किसी वस्तु को देखकर ऐसा लगता है मानो वह कोई दूसरी सुंदर वस्तु हो। इसके प्रमुख वाचक शब्द हैं: जनु, मनु, जानो, मानो, जनहुँ, मनहुँ, निश्चय, इव।
"सोहत ओढ़ै पीत पट स्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर आतप पर्यो प्रभात॥"
श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीले वस्त्र देखकर ऐसी संभावना की गई है "मानो" नीलमणि पर्वत पर प्रातःकालीन सुनहरी धूप पड़ रही हो। "मनहुँ" वाचक शब्द से उत्प्रेक्षा स्पष्ट है।