दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

रे मन मूरख जनम गँवायो।करि अभिमान विषय-रस लंपट, राम-भजन बिसरायो॥

Re man moorakh janam ganwaayo. Kari abhimaan vishay-ras lampat, raam-bhajan bisraayo.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

सूरदास जी अपने मन को सचेत करते हुए कहते हैं कि हे मूर्ख मन! तूने व्यर्थ के अहंकार और सांसारिक विषय-वासनाओं में पड़कर यह अमूल्य मानव जीवन व्यर्थ गँवा दिया और प्रभु-स्मरण को भुला दिया। अब भी समय है कि सत्य मार्ग पर आ जाओ।

English Translation & Meaning:

O foolish mind, you have squandered this precious human incarnation in pursuit of transient sensory pleasures and hollow pride, completely neglecting the devotion to the Divine. Awake before time slips away forever.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: सूरसागर (विनय पद)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

महाकवि सूरदास का यह दोहा 16वीं शताब्दी (भक्तिकाल - सगुण कृष्णाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"रे मन मूरख जनम गँवायो।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'सूरसागर (विनय पद)' में संकलित है।

"रे मन मूरख जनम गँवायो।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

सूरदास जी अपने मन को सचेत करते हुए कहते हैं कि हे मूर्ख मन! तूने व्यर्थ के अहंकार और सांसारिक विषय-वासनाओं में पड़कर यह अमूल्य मानव जीवन व्यर्थ गँवा दिया और प्रभु-स्मरण को भुला दिया। अब भी समय है कि सत्य मार्ग पर आ जाओ।

What is the English meaning of the doha "रे मन मूरख जनम गँवायो।"?▼

O foolish mind, you have squandered this precious human incarnation in pursuit of transient sensory pleasures and hollow pride, completely neglecting the devotion to the Divine. Awake before time slips away forever.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'विनम्रता एवं आत्म-बोध' (Humility & Self-Realization) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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चरन कमल बंदौ हरि राई।

जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधर कौं सब कुछ दरसाई॥

Charan kamal bandau hari rai. / Jaaki kripa pangu giri langhai, andhar kaun sab kuch darsai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

महाकवि सूरदास जी कहते हैं कि मैं प्रभु श्रीहरि के कमल रूपी कोमल चरणों की वंदना करता हूँ। जिनकी कृपा मात्र से लंगड़ा व्यक्ति भी ऊँचे पर्वतों को पार कर जाता है और दृष्टिहीन को संसार का सब कुछ दिखाई देने लगता है। यह पद प्रभु की असीम अनुकंपा और भक्त की अनन्य निष्ठा का अमर प्रतीक है।

English: I bow in deepest adoration to the lotus feet of the Supreme Lord. By His divine grace, the lame can scale soaring mountains and the sightless can perceive the entire universe. It expresses the boundless potency of divine compassion and selfless surrender.

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मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी?

किती बेर मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी॥

Maiya kabahin badhaigi choti? / Kiti ber mohi doodh piyat bhai, yeh ajahun hai chhoti.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

बालकृष्ण माता यशोदा से बाल-सुलभ भाव से शिकायत करते हुए कहते हैं कि हे मैया! मेरी यह चोटी कब बड़ी होगी? मुझे दूध पीते हुए कितना समय बीत गया, परंतु यह आज भी वैसी ही छोटी है! सूरदास जी ने यहाँ बाल मनोविज्ञान और वात्सल्य रस की मनोहारी झाँकी प्रस्तुत की है।

English: Young child Krishna innocently questions Mother Yashoda: "Mother, when will my hair braid finally grow long? You have been feeding me milk for so long, yet it remains as tiny as ever!" Surdas captures the divine innocence of childhood and pure maternal love.

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Kilakat kanha ghuturuvani aavat. / Manimaya kanak nand kain aangan, bimba pakaribai dhaavat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

किलकारी मारते हुए बालकृष्ण घुटनों के बल चले आ रहे हैं। नंद बाबा के स्वर्ण एवं मणियों से जड़े आँगन में अपनी परछाई देखकर वे उसे नन्हें हाथों से पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। सूरदास जी का यह वर्णन वात्सल्य रस की सर्वोच्च पराकाष्ठा माना जाता है।

English: Laughing and babbling with infant delight, Krishna crawls forward on his tender knees across the golden, gem-studded courtyard of King Nanda, eagerly chasing his own shimmering reflection to catch it in his hands.

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मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गइयन के पाछे, मधुवन मोहि पठायो॥

Maiya mori main nahin makhan khayo. / Bhor bhayo gaiyan ke paachhe, madhuvan mohi pathayo.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

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English: Child Krishna endearingly defends himself to Mother Yashoda: "Beloved mother, truly I did not steal or eat the fresh butter! At dawn's first light, you sent me into the pastures behind the cows, so how could I have done it?"

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