दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।मनिमय कनक नंद कैं आँगन, बिंब पकरिबै धावत॥

Kilakat kanha ghuturuvani aavat. Manimaya kanak nand kain aangan, bimba pakaribai dhaavat.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

किलकारी मारते हुए बालकृष्ण घुटनों के बल चले आ रहे हैं। नंद बाबा के स्वर्ण एवं मणियों से जड़े आँगन में अपनी परछाई देखकर वे उसे नन्हें हाथों से पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। सूरदास जी का यह वर्णन वात्सल्य रस की सर्वोच्च पराकाष्ठा माना जाता है।

English Translation & Meaning:

Laughing and babbling with infant delight, Krishna crawls forward on his tender knees across the golden, gem-studded courtyard of King Nanda, eagerly chasing his own shimmering reflection to catch it in his hands.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: सूरसागर (वात्सल्य भाव)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

महाकवि सूरदास का यह दोहा 16वीं शताब्दी (भक्तिकाल - सगुण कृष्णाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'सूरसागर (वात्सल्य भाव)' में संकलित है।

"किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

किलकारी मारते हुए बालकृष्ण घुटनों के बल चले आ रहे हैं। नंद बाबा के स्वर्ण एवं मणियों से जड़े आँगन में अपनी परछाई देखकर वे उसे नन्हें हाथों से पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। सूरदास जी का यह वर्णन वात्सल्य रस की सर्वोच्च पराकाष्ठा माना जाता है।

What is the English meaning of the doha "किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।"?▼

Laughing and babbling with infant delight, Krishna crawls forward on his tender knees across the golden, gem-studded courtyard of King Nanda, eagerly chasing his own shimmering reflection to catch it in his hands.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'भक्ति एवं वात्सल्य' (Divine Love & Affection) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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चरन कमल बंदौ हरि राई।

जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधर कौं सब कुछ दरसाई॥

Charan kamal bandau hari rai. / Jaaki kripa pangu giri langhai, andhar kaun sab kuch darsai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

महाकवि सूरदास जी कहते हैं कि मैं प्रभु श्रीहरि के कमल रूपी कोमल चरणों की वंदना करता हूँ। जिनकी कृपा मात्र से लंगड़ा व्यक्ति भी ऊँचे पर्वतों को पार कर जाता है और दृष्टिहीन को संसार का सब कुछ दिखाई देने लगता है। यह पद प्रभु की असीम अनुकंपा और भक्त की अनन्य निष्ठा का अमर प्रतीक है।

English: I bow in deepest adoration to the lotus feet of the Supreme Lord. By His divine grace, the lame can scale soaring mountains and the sightless can perceive the entire universe. It expresses the boundless potency of divine compassion and selfless surrender.

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जसोदा हरि पालनैं झुलावै।

हलरावै दुलराइ मल्हावै, जोइ सोइ कछु गावै॥

Jasoda hari paalanain jhulaavai. / Halraavai dulraai malhaavai, joi soi kachu gaavai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

माता यशोदा बालकृष्ण को पालने में झुला रही हैं। वे पालने को कभी धीरे से हिलाती हैं, कभी बालक को दुलारती-पुचकारती हैं और जो भी मन में आता है, वही मधुर लोरी गाकर उन्हें सुलाने का प्रयास करती हैं। यह मातृत्व के वात्सल्य की अनुपम अभिव्यक्ति है।

English: Mother Yashoda rocks baby Krishna gently in the cradle. She tenderly sways the cradle, caresses his cheeks, and softly hums whatever loving melodies arise in her heart to lull him to peaceful sleep.

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मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी?

किती बेर मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी॥

Maiya kabahin badhaigi choti? / Kiti ber mohi doodh piyat bhai, yeh ajahun hai chhoti.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

बालकृष्ण माता यशोदा से बाल-सुलभ भाव से शिकायत करते हुए कहते हैं कि हे मैया! मेरी यह चोटी कब बड़ी होगी? मुझे दूध पीते हुए कितना समय बीत गया, परंतु यह आज भी वैसी ही छोटी है! सूरदास जी ने यहाँ बाल मनोविज्ञान और वात्सल्य रस की मनोहारी झाँकी प्रस्तुत की है।

English: Young child Krishna innocently questions Mother Yashoda: "Mother, when will my hair braid finally grow long? You have been feeding me milk for so long, yet it remains as tiny as ever!" Surdas captures the divine innocence of childhood and pure maternal love.

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मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गइयन के पाछे, मधुवन मोहि पठायो॥

Maiya mori main nahin makhan khayo. / Bhor bhayo gaiyan ke paachhe, madhuvan mohi pathayo.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

बालकृष्ण माता यशोदा से भोली सफाई देते हुए कहते हैं कि हे माता! मैंने माखन नहीं खाया है। प्रातःकाल होते ही तुमने मुझे गायों को चराने के लिए मधुवन भेज दिया था, फिर मैं माखन कैसे चुरा सकता था? यह सूरदास का अत्यंत लोकप्रिय पद है।

English: Child Krishna endearingly defends himself to Mother Yashoda: "Beloved mother, truly I did not steal or eat the fresh butter! At dawn's first light, you sent me into the pastures behind the cows, so how could I have done it?"

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