Sansrishti (Independent Collocation of Figures) — लक्षण, परिभाषा व उदाहरणसंसृष्टि अलंकार
उच्चारण व लिपि: Sansrishti Alankar
जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार (शब्दालंकार अथवा अर्थालंकार) किसी एक पद्य में इस प्रकार एकत्र हों कि वे एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र रहें (तिल और चावल के मिश्रण की तरह, जिन्हें आसानी से अलग किया जा सके), वहाँ "संसृष्टि अलंकार" होता है।
एक ही पद्य में दो अलग-अलग अलंकार मौजूद हों और दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर न हो।
Tip in English: Multiple distinct figures of speech coexist side-by-side in a verse without depending on one another.
"भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥"
काव्यशास्त्रीय विश्लेषण (Literary Explanation):
यहाँ "भूप सहस दस" में अतिशयोक्ति अलंकार है और "टरइ न टारा" में अनुप्रास अलंकार है। दोनों अलंकार अपने-अपने स्थान पर स्वतंत्र रूप से स्पष्ट हैं।
Analysis in English: Ten thousand kings lifting simultaneously exemplifies Atishayokti (hyperbole), while "tarai na tara" contains Anuprasa (alliteration), both resting independently.
समान श्रेणी के अन्य प्रमुख अलंकार (उभयालंकार)
सभी उभयालंकार देखें →संकर अलंकार
Sankara (Inextricable Blend of Figures)
जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार इस प्रकार घुले-मिले हों कि उन्हें एक-दूसरे से पृथक् न किया जा सके (जैसे दूध और पानी का मिश्रण — क्षीर-नीर न्याय), अथवा यह निर्णय करना कठिन हो कि मुख्य कौन है और गौण कौन, वहाँ "संकर अलंकार" होता है।
"चरण-कमल मृदु मंजु तुम्हारे।"
यहाँ "चरण-कमल" में रूपक अलंकार (अभेद आरोप) भी है और "मृदु मंजु" के कारण उपमा का भाव भी समाहित है; दोनों अलंकार क्षीर-नीर की भाँति परस्पर मिले हुए हैं।