Sankara (Inextricable Blend of Figures) — लक्षण, परिभाषा व उदाहरणसंकर अलंकार
उच्चारण व लिपि: Sankara Alankar
जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार इस प्रकार घुले-मिले हों कि उन्हें एक-दूसरे से पृथक् न किया जा सके (जैसे दूध और पानी का मिश्रण — क्षीर-नीर न्याय), अथवा यह निर्णय करना कठिन हो कि मुख्य कौन है और गौण कौन, वहाँ "संकर अलंकार" होता है।
एक ही अभिव्यक्ति में दो अलंकारों का ऐसा परस्पर गुंफन जिसे अलग-अलग करके देखना संभव न हो।
Tip in English: Two figures of speech so tightly fused into a single expression that neither can be isolated without dissolving the other.
"चरण-कमल मृदु मंजु तुम्हारे।"
काव्यशास्त्रीय विश्लेषण (Literary Explanation):
यहाँ "चरण-कमल" में रूपक अलंकार (अभेद आरोप) भी है और "मृदु मंजु" के कारण उपमा का भाव भी समाहित है; दोनों अलंकार क्षीर-नीर की भाँति परस्पर मिले हुए हैं।
Analysis in English: Charan-Kamal manifests Rupak (metaphor) while Mridu Manju introduces Upama (simile quality), thoroughly interwoven like milk and water.
समान श्रेणी के अन्य प्रमुख अलंकार (उभयालंकार)
सभी उभयालंकार देखें →संसृष्टि अलंकार
Sansrishti (Independent Collocation of Figures)
जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार (शब्दालंकार अथवा अर्थालंकार) किसी एक पद्य में इस प्रकार एकत्र हों कि वे एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र रहें (तिल और चावल के मिश्रण की तरह, जिन्हें आसानी से अलग किया जा सके), वहाँ "संसृष्टि अलंकार" होता है।
"भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥"
यहाँ "भूप सहस दस" में अतिशयोक्ति अलंकार है और "टरइ न टारा" में अनुप्रास अलंकार है। दोनों अलंकार अपने-अपने स्थान पर स्वतंत्र रूप से स्पष्ट हैं।