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Ubhayalankar (Dual-aspect Devices)उभयालंकार — लक्षण, भेद एवं प्रामाणिक उदाहरण

जहाँ काव्य में शब्द और अर्थ — दोनों के एक साथ चमत्कारी प्रयोग से विशिष्ट सौंदर्य उत्पन्न होता है, वहाँ उभयालंकार होता है (जैसे संकर एवं संसृष्टि अलंकार)।

🎯 काव्यशास्त्रीय महत्त्व:शब्द और अर्थ का संतुलित, परस्पर संपुष्ट समन्वय। (Harmonious synthesis of both acoustic and semantic richness.)

उभयालंकार के अंतर्गत आने वाले अलंकार

कुल 2 अलंकार उपलब्ध
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उभयालंकारCompetitive Exams
#sansrishti

संसृष्टि अलंकार

Sansrishti (Independent Collocation of Figures)

जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार (शब्दालंकार अथवा अर्थालंकार) किसी एक पद्य में इस प्रकार एकत्र हों कि वे एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र रहें (तिल और चावल के मिश्रण की तरह, जिन्हें आसानी से अलग किया जा सके), वहाँ "संसृष्टि अलंकार" होता है।

काव्य उदाहरण (Poetic Line):

"भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥"

यहाँ "भूप सहस दस" में अतिशयोक्ति अलंकार है और "टरइ न टारा" में अनुप्रास अलंकार है। दोनों अलंकार अपने-अपने स्थान पर स्वतंत्र रूप से स्पष्ट हैं।

💡 ट्रिक:एक ही पद्य में दो अलग-अलग अलंकार मौजूद हों और दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर न हो।
उभयालंकारCompetitive Exams
#sankara

संकर अलंकार

Sankara (Inextricable Blend of Figures)

जहाँ दो या दो से अधिक अलंकार इस प्रकार घुले-मिले हों कि उन्हें एक-दूसरे से पृथक् न किया जा सके (जैसे दूध और पानी का मिश्रण — क्षीर-नीर न्याय), अथवा यह निर्णय करना कठिन हो कि मुख्य कौन है और गौण कौन, वहाँ "संकर अलंकार" होता है।

काव्य उदाहरण (Poetic Line):

"चरण-कमल मृदु मंजु तुम्हारे।"

यहाँ "चरण-कमल" में रूपक अलंकार (अभेद आरोप) भी है और "मृदु मंजु" के कारण उपमा का भाव भी समाहित है; दोनों अलंकार क्षीर-नीर की भाँति परस्पर मिले हुए हैं।

💡 ट्रिक:एक ही अभिव्यक्ति में दो अलंकारों का ऐसा परस्पर गुंफन जिसे अलग-अलग करके देखना संभव न हो।