दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।जा तन की झाँईं परैं, स्याम हरित दुति होइ॥

Meri bhav baadha harau, radha naagari soi. Jaa tan ki jhaan-een parain, syaam harit duti hoi.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

बिहारीलाल मंगलाचरण में प्रार्थना करते हैं कि वे चतुर और मंगलमयी श्रीराधाजी मेरे सभी सांसारिक कष्टों और बाधाओं को हर लें। जिनके गौरवर्ण शरीर की आभा या परछाई पड़ने मात्र से श्यामवर्ण (नीले-काले) श्रीकृष्ण भी परम प्रसन्न होकर हरे रंग की उज्ज्वल कांति वाले हो जाते हैं।

English Translation & Meaning:

May the gracious and graceful Sri Radha alleviate all the worldly tribulations of my mortal existence—she by the mere radiant reflection of whose golden aura, the dark-hued Lord Krishna turns gleeful and shines with a blissful verdant glow.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: बिहारी सतसई (मंगलाचरण)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

महाकवि बिहारीलाल का यह दोहा 17वीं शताब्दी (रीतिकाल - रीतिसिद्ध कवि) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा महाकवि बिहारीलाल द्वारा रचित है। यह दोहा 'बिहारी सतसई (मंगलाचरण)' में संकलित है।

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

बिहारीलाल मंगलाचरण में प्रार्थना करते हैं कि वे चतुर और मंगलमयी श्रीराधाजी मेरे सभी सांसारिक कष्टों और बाधाओं को हर लें। जिनके गौरवर्ण शरीर की आभा या परछाई पड़ने मात्र से श्यामवर्ण (नीले-काले) श्रीकृष्ण भी परम प्रसन्न होकर हरे रंग की उज्ज्वल कांति वाले हो जाते हैं।

What is the English meaning of the doha "मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।"?▼

May the gracious and graceful Sri Radha alleviate all the worldly tribulations of my mortal existence—she by the mere radiant reflection of whose golden aura, the dark-hued Lord Krishna turns gleeful and shines with a blissful verdant glow.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'भक्ति एवं वंदना' (Devotion & Spirituality) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।

या खाये बौराय जग, या पाये बौराय॥

Kanak kanak te sau guni, maadakta adhikaay. / Yaa khaaye bauraay jag, yaa paaye bauraay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

महाकवि बिहारीलाल कहते हैं कि सोने (स्वर्ण/धन-दौलत) में धतूरे (नशीले फल) की तुलना में सौ गुना अधिक नशा होता है। क्योंकि धतूरे को तो खाने के बाद व्यक्ति मतवाला या बावला होता है, किंतु सोने (अथाह धन) को तो मात्र पा लेने से ही मनुष्य अहंकार में अंधा और उन्मत्त हो जाता है। यह यमक अलंकार और नीति का प्रसिद्ध उदाहरण है।

English: Gold (wealth) carries a hundredfold more intoxicating arrogance than the poisonous Datura berry. For the berry intoxicates only when consumed, but the mere acquisition of wealth turns a man haughty and deluded with pride.

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सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर।

देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गंभीर॥

Sat-saiya ke dohre, jyon naavak ke teer. / Dekhan mein chhote lagain, ghaav karain gambheer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कवि बिहारी की सतसई के दोहे किसी कुशल तीरंदाज (नावक) के छोटे बाणों के समान हैं। वे देखने में अत्यंत संक्षिप्त और छोटे प्रतीत होते हैं, परंतु उनका मर्म और अर्थ इतना गहरा होता है कि वे सहृदय पाठक के हृदय पर अत्यंत गंभीर और गहरा प्रभाव डालते हैं।

English: The brief rhyming couplets of Bihari Satsai resemble the diminutive arrows of an expert archer. Deceptively concise in outward form, they pierce the intellect and heart with profound, lasting philosophical depth.

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नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकासु इहिं काल।

अली कली ही सौं बँध्यौ, आगे कौन हवाल॥

Nahin paraag nahin madhur madhu, nahin vikaasu ihin kaal. / Ali kali hi saun bandhyau, aage kaun hawaal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

बिहारी ने आमेर के राजा जयसिंह को भोग-विलास से जगाकर राजधर्म की ओर प्रेरित करने के लिए यह अन्योक्ति दोहा रचा था। हे भौंरे (राजा)! इस कली में अभी न पराग है, न मधुर मकरंद, और न ही यह पूर्ण विकसित हुई है। यदि तू अभी से कली पर ही मोहित होकर बँध गया है, तो जब यह फूल बनेगी तब तेरी क्या दशा होगी? यह कर्तव्यबोध का प्रेरक दोहा है।

English: Addressed allegory to King Jai Singh to awaken him to statecraft: "There is neither pollen nor sweet nectar in this bud yet, nor has it blossomed. If the bee is already captivated by a tender unblown bud, what fate awaits the kingdom when it blooms into full flower?"

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बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।

सौंह करैं भौंहनु हँसै, दैन कहै नटि जाय॥

Bataras laalach laal ki, murli dhari lukaay. / Saunh karain bhaunhanu hansai, dain kahai nati jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

गोपियों ने श्रीकृष्ण से बातचीत के आनंद (बतरस) के लोभ में उनकी प्यारी बाँसुरी छिपाकर रख दी। जब कृष्ण बाँसुरी माँगते हैं, तो गोपियाँ सौगंध खाती हैं कि हमारे पास नहीं है, परंतु अपनी भौंहों के इशारों से मंद-मंद मुस्कुराती हैं। फिर जब देने को कहती हैं, तो मुकर जाती हैं। यह शृंगार और हास-परिहास का सुंदर दोहा है।

English: Eager for the sheer delight of conversing with Krishna, the playful Gopis have hidden away his beloved flute. When he demands it, they take solemn oaths of innocence while laughing secretly with their arched eyebrows, and when asked to return it, they playfully refuse.

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